जब चंबा पर हो गया था कश्मीर का कब्जा, राज दरबार में तैनात किए गए थे चंबा के हिंदू मंत्री

जब चंबा पर हो गया था कश्मीर का कब्जा, राज दरबार में तैनात किए गए थे चंबा के हिंदू मंत्री
जब चंबा पर हो गया था कश्मीर का कब्जा, राज दरबार में तैनात किए गए थे चंबा के हिंदू मंत्री
विनोद भावुक/ चंबा
14वीं सदी के कश्मीर के इतिहास में शिहाबुद्दीन शाह की वीरता और दूरदर्शिता की गाथाएं आज भी जीवंत हैं। शिहाबुद्दीन शाह को ‘शेराशामक’ यानी ‘सिंह का पंजा’ कहा जाता था। शिहाबुद्दीन शाह ने 1354 से 1373 तक कश्मीर की सत्ता संभाली। उनके शासनकाल को कश्मीर के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली काल में से एक माना जाता है।
शिहाबुद्दीन शाह ने सामाजिक और प्रशासनिक स्थिरता स्थापित करने के बाद अपने पड़ोसी राज्यों को अपने साम्राज्य में शामिल करने की योजना बनाई। सेनापति मलिक चंद्र के नेतृत्व में कश्मीर की सेना ने चंबा सहित कई पहाड़ी राज्यों पर विजय प्राप्त की। इस जीत ने कश्मीर के क्षेत्र को दक्षिण की ओर बढ़ाया और साम्राज्य की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति को मजबूती दी।
प्रशासन में धार्मिक और सांस्कृतिक सहिष्णुता
चंबा जैसे क्षेत्र पर विजय प्राप्त करने के बादशिहाबुद्दीन शाह ने अपने प्रशासन में धार्मिक और सांस्कृतिक सहिष्णुता बनाए रखी। उन्होंने अपने दरबार में कोटा भट और उद्यश्री जैसे हिंदू मंत्रियों को महत्वपूर्ण पदों पर रखा। इस फैसले ने न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाया, बल्कि साम्राज्य के भीतर विभिन्न समुदायों के बीच सामंजस्य बनाए रखने में भी मदद की।
चंबा की विजय और पड़ोसी राज्यों के अधिग्रहण के बाद शिहाबुद्दीन शाह का साम्राज्य कश्मीर से लेकर काबुल, लद्दाख से लेकर पश्चिमी पंजाब तक अपने चरम विस्तार पर पहुंच गया। कुछ की सालों में शिहाबुद्दीन शाह की दूरदर्शिता, रणनीति और धार्मिक सहिष्णुता ने उन्हें कश्मीर का सबसे महान शासक बना दिया।
‘किंग्स ऑफ कश्मीरा’ में दर्ज इतिहास
1879 में प्रकाशित जे सी दत्त अपनी पुस्तक ‘किंग्स ऑफ कश्मीरा’ में लिखते हैं कि चंबा पर विजय के बाद शिहाबुद्दीन शाह ने अपनी रियासत का चरम विस्तार किया। वे लिखते हैं कि राज्य विस्तार के बाद 1370 के आसपास शिहाबुद्दीन शाह ने श्रीनगर लौटकर शांति से शासन किया। उनका निधन 6 जून 1373 को हुआ।
1959 में जर्नल ऑफ़ द अमेरिकन ओरिएंटल सोसाइटी, में प्रकाशित ‘कश्मीर अंडर सुल्तान’ में रेट्ज़लाफ़, राल्फ़ एच, हसन और मोहिबुल ने शिहाबुद्दीन शाह के कार्यकाल को कश्मीर राज्य का स्वर्णकाल कहा है।
उन्होंने शिहाबुद्दीन शाह की छवि को सिंह के पंजे की तरह बताया है, जो वीरता, नीति और सहिष्णुता का प्रतीक है।
नोट : फोटो कल्पना पर आधारित ए आई जनरेट इमेज है।
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Jyoti maurya

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