जब शिमला में जुटे सिख समाज के सुधारक, सिंह सभा आंदोलन के दिग्गजों की ऐतिहासिक तस्वीर

जब शिमला में जुटे सिख समाज के सुधारक, सिंह सभा आंदोलन के दिग्गजों की ऐतिहासिक तस्वीर
जब शिमला में जुटे सिख समाज के सुधारक, सिंह सभा आंदोलन के दिग्गजों की ऐतिहासिक तस्वीर
हिमाचल बिजनेस। शिमला
सिंह सभा आंदोलन के नेता तत्कालीन ब्रिटिश सरकार से संवाद करने शिमला आते थे। शिमला भारत की गर्मियों की राजधानी होने के चलते अंग्रेज़ अधिकारियों का ठिकाना था। सिख नेता अपने मुद्दों को लेकर शिमला में ब्रिटिश अधिकारियों से बैठकें करते थे। इस तस्वीर में उस दौर के प्रमुख सिख नेता साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। काहन सिंह नाभा का निधन 1938 में हुआ था, मतलब तस्वीर उससे पहले की है।
इस तस्वीर में भाई अर्जन सिंह बागरियां, सर जोगिंदर सिंह, सरदार उमराव सिंह शेरगिल, सरदार गुरदियाल सिंह मान, भाई काहन सिंह नाभा और सर सुंदर सिंह मजीठिया शामिल हैं। ये सभी सिंह सभा आंदोलन के प्रमुख चेहरे थे, जिसने 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में सिख समाज में धार्मिक सुधार, शिक्षा और पहचान को सशक्त बनाने का कार्य किया।
‘महान कोश’ सिख साहित्य का विश्वकोश
ब्रिटिश काल में शिमला प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र था। गर्मियों में वायसराय और उच्च अधिकारी यहीं रहते थे। पंजाब और पहाड़ी रियासतों के प्रतिनिधि भी यहीं बैठकें करते थे। उस दौर में सिंह सभा जैसे सुधारवादी आंदोलन को भी अपनी बात रखने और नेटवर्क बनाने के लिए शिमला उपयुक्त स्थान मिला। इस कारण यह ऐतिहासिक तस्वीर शिमला में खींची गई मानी जाती है।
1873 में स्थापित सिंह सभा आंदोलन का उद्देश्य सिख धर्म की मूल शिक्षाओं का पुनर्जागरण, गुरुमुखी और पंजाबी भाषा का प्रचार, शिक्षा संस्थानों की स्थापना और धार्मिक ग्रंथों का संपादन और प्रकाशन करना था। भाई काहन सिंह ने ‘महान कोश’ जैसा ऐतिहासिक ग्रंथ तैयार किया, जो सिख साहित्य का विश्वकोश माना जाता है।
दिल्ली- शिमला में सिखों का प्रभाव
इस तस्वीर में मौजूद अधिकांश नेता 1940- 50 के दशक में दिवंगत हुए। यह समूह उस दौर के सिख राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व की सामूहिक शक्ति को दर्शाता है। उस दौर का शिमला ऐसे बौद्धिक और सुधारवादी विमर्शों का साक्षी रहा है। यहां लिए गए निर्णयों और बैठकों ने पंजाब के सामाजिक इतिहास को गहराई से प्रभावित किया।
तस्वीर में शामिल भाई अर्जन सिंह बागरियां, सर जोगिंदर सिंह, सरदार उमराव सिंह शेरगिल, सरदार गुरदियाल सिंह मान, भाई काहन सिंह नाभा और सर सुंदर सिंह मजीठिया सामाजिक और धार्मिक भूमिका के अलावा अपने- अपने क्षेत्र की चर्चित हस्तियां थीं, जिनका न केवल पंजाब बल्कि दिल्ली और शिमला में भी खास प्रभाव था।
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Jyoti maurya

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