जहां निर्दोष साधक को फांसी पर चढ़ाया, वहीं राजा को बनवाना पड़ा उसके नाम का मंदिर, डाडासीबा के प्राचीन घौली सिद्ध धाम से जुड़ी सीबा रियासत की सच्ची कहानी

जहां निर्दोष साधक को फांसी पर चढ़ाया, वहीं राजा को बनवाना पड़ा उसके नाम का मंदिर, डाडासीबा के प्राचीन घौली सिद्ध धाम से जुड़ी सीबा रियासत की सच्ची कहानी
जहां निर्दोष साधक को फांसी पर चढ़ाया, वहीं राजा को बनवाना पड़ा उसके नाम का मंदिर, डाडासीबा के प्राचीन घौली सिद्ध धाम से जुड़ी सीबा रियासत की सच्ची कहानी
विनोद भावुक। धर्मशाला
सीबा रियासत के राजा के आदेश पर जिस स्थान पर एक निर्दोष साधक को दी थी फांसी पर चढ़ा दिया गया था, सच सामने आने पर राजा ने उसी स्थान पर उस सिद्ध के नाम का मंदिर बनाया। आज भी राज परिवार के सदस्य हर साल इस मंदिर में नतमस्तक होते हैं। सीबा रियासत के डडोआ और वर्तमान में कांगड़ा जिला के डाडासीबा में घौली सिद्ध का प्राचीन पावन धाम स्थित है।
जब अहंकार झुकता है और हृदय में प्रायश्चित जागता है, तब स्वयं ईश्वर करुणा बरसाते हैं। यह पावन स्थल केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि गुनाह स्वीकार करने, पश्चाताप करने और धौली सिद्ध की दिव्य क्षमा का जीवंत प्रतीक है। आइये सुनते हैं, डाडासीबा के प्राचीन घौली सिद्ध धाम से जुड़ी सीबा रियासत की सच्ची कहानी।
सिद्ध पुरुष पर लगे आरोप, मृत्युदंड की सजा
प्राचीन सीबा रियासत में घौली नाम के एक सिद्ध पुरुष हुए। वे हर वक्त सिद्धि-साधना और आध्यात्मिक तपस्या में लीन रहते थे। एक बार उन पर झूठे आरोप लगे और मामला राजदरबार तक पहुंच गया। राजा ने घौली को दरबार में हाजिर होने का निर्देश दिया गया। साधना में लीन घौली तत्काल राज दरबार में उपस्थित न हुये तो राजा ने उन्हें बलपूर्वक दरबार में बुलवाया।
घौली ने प्रार्थना की कि वे निर्दोष हैं, परंतु क्रोधवश राजा ने सच की तह तक जाने के बजाए उन्हें मृत्युदंड दे दिया। सजा से पहले घौली ने अंतिम इच्छा के तौर पर स्नान करने की अनुमति माँगी। दंड देने वाले जल का कोई साधन न था। तब उन्होंने भूमि में छोटा सा गड्ढा खोदा और चमत्कार हो गया। उस उथले गड्ढे से जल फूट पड़ा, जिसे देख सैनिक स्तब्ध रह गए।
मौत के साथ हरा हो गया पेड़
फांसी से पहले घौली ने पुकार कर कहा कि यदि वह निर्दोष हुआ तो सालों से सूखा पेड़ कल से हरा हो उठेगा। तब समझ लेना कि सच को दंड दिया गया है। घौली को सैनिकों ने फांसी दे दी, लेकिन अगले दिन घौली का कहा सच हो गया और वह सूखा पेड़ हरा-भरा हो गया। यह दृश्य देखकर सभी लोग हैरान रह गए और चारों ओर इसकी चर्चा होने लगी।
उस समय सीबा रियासत पर सीबैईया राजपरिवार के पराक्रमी राजा भोई सिंह अर्थात भोईया (जिन्हें कुछ अंग्रेज़ इतिहासकारों ने संबोधन की त्रुटि के कारण भाऊ सिंह या भाग सिंह भी लिखा है) राज कर रहे थे। हालांकि वे वीर और न्यायप्रिय राजा थे, लेकिन बेहद गुस्सैल थे। उन्हीं के आदेश पर धौली को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
भोजन में दिखने लगे कीड़े, राजा ने मांगी माफी
इस फैसले के बाद राजा जब भी भोजन करने बैठते, उनके भोजन में कीड़े दिखाई देते। उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। यह दैवी संकेत था। आठवें दिन जब सैनिक अधिकारियों ने सारी घटना राजा को सुनाई, तो वे खुद उस स्थल पर पहुँचे और हरा हो चुका था पेड़ देखा तो राजा का हृदय द्रवित हो उठा। सच सामने आने पर घौली सिद्ध के चरणों में नतमस्तक होकर अश्रुपूर्ण नेत्रों से क्षमा याचना की।
राजा ने सच्चे दिल से पश्चाताप किया। धौली सिद्ध की शक्ति से राजा के कष्ट दूर हो गए। झूठे आरोप लगाने वाले भी सिद्ध स्थल पर आकर क्षमा माँगने लगे और अपने अपराध स्वीकार कर लिए। राजपरिवार प्रायश्चित स्वरूप उसी फांसी स्थल पर घौली सिद्ध का मंदिर स्थापित कराया। आज भी राजपरिवार के सदस्य हर साल यहाँ आकर अपने पूर्वजों की भूलों के लिए नतमस्तक होते हैं।
एक घटना से कई संदेश
सीबा रियासत की यह घटना इस बात का सबूत है कि क्रोध निर्णय को अंधा कर देता है, लेकिन सत्य कभी नष्ट नहीं होता। इस कथा का एक पक्ष यह भी है कि अपराध स्वीकार करना महानता है। सच्चा पश्चाताप ईश्वर को द्रवित कर देता है। जो व्यक्ति अपनी गलती मानकर प्रायश्चित करता है, वही सच्चा महान कहलाता है।
सीबा रियासत के वर्तमान राजा डा० अशोक कुमार ठाकुर कहते हैं कि गलती मनुष्य से होती है, उसे स्वीकार कर पश्चाताप करना देवत्व है। वे अपने पूर्वजों की भूल के लिए क्षमा मांगने वे हर साल इस मंदिर में परिवार सहित जाते हैं। उनका कहना है कि कोई भी व्यक्ति इस दिव्य धाम में पधार कर आत्मशुद्धि, क्षमा और करुणा की अनुभूति कर सकता है।
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Jyoti maurya

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